रविवार, 14 सितंबर 2025

 समूचे विश्व में युद्धों में मारे गए निर्दोष नागरिकों, सैनिकों, बच्चों , पशुओं, वृक्षों कीट पतंगों , व प्रकृति की हर संरचना के विध्वंश पर उन्हें श्रद्धांजलि।  

        क्रूर, अत्याचारी , सत्ता लोलुप तानाशाहों को धिक्कार। 






  आज स्वर्गीय पिताजी का श्राद्ध है।  तीन  साल हो गए हैं. आज भी लगता है कि  पिताजी यहीं कहीं आस - पास हैं, उनकी ममता एवं छत्र छाया में व्यतीत जीवन मेरे भविष्य की सुदृढ़ नींव है । आप जहाँ भी हैं आपको दण्डवत नमन।

रविवार, 27 जुलाई 2025

 विश्व में युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहे।  रूस - यूक्रेन/नाटो  , हमास -  इज़राइल , हिज़्बुल्ला - इज़राईल, ईरान -इज़राईल  के सर्वनाशी युद्धों के  साथ -साथ एक छोटी - सी झलक भारत और पाकिस्तान की भी देखने को मिली इसके साथ ही कम्बोडिया थाईलैंड   और भी कई देश युद्ध के मुहाने पर खड़े हैं. हर ओर  भयंकर विनाश का तांडव देखने को मिल रहा है।  शांति के लिए बोलने वालों की आवाज हवा में घुल कर  लुप्त हो जा रही है. विनाशक हथियारों , परमाणु  अस्त्रों के दम्भ में कोई देश किसी की सुनाने को तैयार नहीं है. राष्ट्रों को युद्धों की आग में झोंकने वाले तानाशाह, आतंकवाद के पोषक राष्ट्रों के क्रूर और निर्मम शासक अज्ञात जगहों पर  अपने बंकरों में छुपे मौज कर सिर्फ बमबारी के आदेश दे रहे हैं. मरने वालों का कोई आंकड़ा नहीं है।  भूख ,विस्थापन ,भय यह सब आम नागरिकों के लिए दैनिक जीवन का एक हिस्सा बन चुका है. निर्दोष जनता और निर्दोष सैनिकों  को विनाशक हथियारों की आग में झोंका जा रहा है.  और यह सब तानाशाहों के सत्ता की हवस के सिवाय कुछ नहीं है.     

विश्व के सभी जागरूक नागरिक प्रकृति, समस्त प्राणी ,पर्यावरण एवं  मानवता के पक्ष में युद्धों के विरुद्ध अपनी आवाज तेज करें।  युद्धों का विरोध करें। 

सोमवार, 24 मार्च 2025

समूचा विश्व युद्धों के चक्रव्यूह से निकल नहीं पा  रहा है।  दुनियां के शांतिप्रिय नेताओं के सारे प्रयास निष्फल होते दिख रहे हैं. अंधाधुंध बमबारी झेलना लोगों की दिनचर्या बन गई है।  कब कौन कहाँ बम का शिकार हो जाय कोई नहीं जानता।  सब एक दूसरे से विदा लिए हुए हैं, जीवन के प्रति संवेदनाएं, भावनाएं लुप्त हो गई हैं.. यह  त्रासदी हृदय विदारक है।  लोग हैं जो अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहें। कब कौन कहाँ अचानक धमाके के साथ ही चीथड़ों में बदल जाय कुछ कहा नहीं जा सकता। 
तानाशाहों को अपनी सेनाओं और संहारक अस्त्र शस्त्रों , मिसाइलों  बमवर्षकों पर भरोसा है। कि सेनाएं सब कुछ समाप्त कर सकती हैं।  युद्ध एक विनाशकारी धुन है. 

युद्ध  और आतंकवाद से दुनियां के आम नागरिक भयातुर हैं, 

शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2025





अद्भुद रंग लेकर आया है बसन्त। खेतों ने सरसों के बसंती रंग दे दिये हैं  और जंगलों ने कई प्रकार के फूलों के रंग।  महल के पेड़ धवल सुमनों से लदे  हुए हैं.  छोटी छोटी  बनस्पतियाँ अपने सम्मोहक रंग बिरंगे /सुनहरे  के परिधान पहनकर आकर्षित करते  हैं। आजकल सायंकालीन और प्रातः भ्रमण का  अनूठा आनंद है. मन को सुखद अनुभूति होती है।  कुछ पल के लिए आदमी सारे दुःख , तनाव भूल जाता है।  लगता है  कि इस दुनियां में प्रकृति और इसके सौंदर्य के अतिरिक्त कुछ भी नहीं  है. लौटते हुए एक सुखद ताजगी की अनुभूति होती है. 
कुछ पलों के लिए हम प्रकृति का हिस्सा होते हैं. प्रकृति का एक - एक पौंधा चाहता है कि  हम उनसे बातें करें. उनके रंगों की प्रशंसा  करें. 
दुनियां के तानाशाह प्रकृति से बेखबर युद्धों में व्यस्त हैं. सृजन के विपरीत युद्ध और विनाश उनकी प्राथमिकताएं हैं. और विनाशकारी युद्धों का यह दौर थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। आम आदमी के जीवन का मूल्य तानाशाहों की दृष्टि में  कोई अर्थ नहीं रखता है।  आम आदमी शांति चाहता है।   









 

शनिवार, 2 नवंबर 2024

 दीपावली की आप सभी पाठक मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएं






 

इस पावन पर्व पर आप सुख, समृद्धि, धन धान्य, वैभव, यश से परिपूर्ण हों। विश्व का कल्याण हो, विश्व में शान्ति हो । 

मंगलवार, 1 अक्टूबर 2024

 ऋतु  एक सुहावनी करवट ले रही है।  बरसात के बाद आसमान बिल्कुल प्रदुषण रहित ,साफ़- स्वच्छ होने के  कारण सूर्य की किरणें गर्म लोहे की छड़ की तरह तेज और बदन को जला देने वाली पड़  रही हैं. दिन छोटे होने लगे हैं. 

उत्तराखंड के पहाड़ों के गावों में  खेती का काम आरम्भ हो गया है। यानि आश्विन मास लग गया है।    ग्रामीण आजकल  इतने व्यस्त हैं. कि  बुखार और छोटी- मोटी बीमारियों की चिकित्सा आदि के लिए चिकित्सक के पास जाने का भी समय नहीं, वो तो खेत से घर और घर से खेत आने जाने में  ही ठीक हो जाता है। खाने के लिए घर आने का भी समय नहीं होता है घर का एक सदस्य खाना बनाकर उनके लिए खेतों में ले  जाता है।  या सुबह  घर से खाना  बनाकर अपने साथ ले जाते हैं। किसान होना कोई आसान काम नहीं है. हमें मात्र तैयार उपज  दिखती है।  

कुछ ही समय पश्चात् बाजार में नई फसल की  गहत, उड़द , मडुवा , झंगोरा, बाजरा, तिल, चौलाई, धान आदि आने लगेगा ।  फसल के साथ -साथ पूरे वर्ष भर के लिए पशुओं के लिए घास भी जमा करनी होती है।  और अगली बुआई के लिए खेत भी तैयार करने होते हैं।  

रोजगार के अभाव  में पहाड़ों से पलायन के कारण कृषि और पशु पालन भी प्रभावित हुआ है। बच्चे न होने के कारण कई गावों में स्कूल बंद होने की स्थिति में हैं. कई गावों में पहाड़ी शैली में बने आलीशान नक्काशीदार  घर खंडहर हो चुके हैं।  आधे से अधिक खेत बंजर हो चुके हैं। 

जो एक बार यहाँ से रोजगार के लिए पलायन कर गया वह फिर लौट कर गावं देखना भी नहीं चाहता ,या  रोजगार की आपाधापी में उसे गावं के बारे में सोचने का भी समय नहीं मिल पता हो।  


शनिवार, 4 मई 2024

 प्रणाम मित्रो ,

हमारे उत्तराखंड ( भारत ) में जंगलों में लगने वाली आग से वातावरण धुआं - धुआं हो रहा है।  बाहर प्रचंड गर्मी है।  यदि वनाग्नि नहीं लगी होती तो इतनी गर्मी नहीं पड़ती।  हर वर्ष लगाने वाली इस आग ने  न मालूम कितनी महत्वपूर्ण जड़ी बूटियों का  वंश समाप्त हो जाता है।  धरती हर वर्ष पेड़/ वनस्पतियां  उगाकर धरती को हरा भरा बनाने की कोशिश करती है। 

हर बरसात में वृक्षारोपण होता है और हर मई - जून में  सब स्वाहा हो जाता है।  

इस्राईल - हमास- ईरान , यूक्रेन - रूस , पिछले एक साल से भी अधिक समय से चल रहे हैं. धरती फाड़ी जा रही है. निर्दोष प्राणी मरे जा रहे हैं. हिंसा और विनाश का यह खेल बंद होने का नाम नहीं ले रहा है. सारे घातक और विनाशक  हथियारों का प्रयोग /प्रदर्शन हो रहा है, 

युद्धों की इस सनक / पागलपन में जीवन का कोई मूल्य नहीं, 

यूनाइटेड नेशंस की भूमिका अभी स्पष्ट नहीं दिख रही है कि युद्ध बनाये रखना चाहता है या रोकना।  युद्ध  लड़ाने  वालों की और है या पीड़ितों की और।  

नाटो देश अपने हथियार खपाने में लगे हैं।  

यह मानवीय हितों के प्रति  विश्व समुदाय का  स्तब्ध कर देने वाला व्यवहार  है।  

गुरुवार, 18 जनवरी 2024

 अँधेरे को भी अस्त होना होता है।  बिलकुल दिन की मानिंद। उसकी अवधि और महत्त्व दोनों हैं।  महाभारत कालीन युद्धों में भी  रात को  युद्ध विराम होता था।  आज तो भयंकर विनाशकारी युद्ध , बमबारी रात  को ही हो रही हैं, 

रात एक विराम  का नाम भी है जो आपके दुखों, तनावों, द्वंद्वों को अपनी ममता की छाँव देती है।  सबकुछ भूलकर सो जाने को कहती  है। आपकी पीड़ाएँ रात बाँट लेती है. एक सुखद सुबह के आगमन का आश्वासन देती है। 

इसलिए दिनभर की थकान , ऊब निराशा, को ऊर्जावान दूसरे दिन में बदलने ,  जीवन में एक नए प्रकाश आगमन के लिए  रात का स्वागत करें. 

शांति के लिए रात  का भी एक उत्सव की तरह स्वागत करें। 

आपका जीवन सुखमय और लम्बा होगा। 

दिन को भूल  जाएँ क्योँकि वह लौटकर आनेवाला नहीं है।  हाँ दिन की भूलें जरूर याद रखें।  रात के अँधेरे को उन भूलों को भी मिटाने का अवसर दें। दिनभर के सारे द्वन्द्व रात को सौंप दें। 

भोर एक नए समाधान के साथ जरूर आएगी।  

स्वप्न देखें  . अचेतन भी संकेत देता है. 

मंगलवार, 26 दिसंबर 2023

 भारी बमबारी के बीच सांता इस्राइल- ग़ज़ा पहुंचा या नहीं, यूक्रेन-  रसिया पहुंचा या नहीं। क्योँकि वहां सांता के जाने का समाचार नहीं देखा।  कोई शांति लिए नोबल पुरस्कार विजेता बम बर्षकों के नीचे  खड़े होकर चिल्लाया नहीं कि  बंद करो ये विनाश। ऐसा भी कोई समाचार नहीं देखा।  किसी को  कंधे में क्रॉस रख कर वहां  शांति की अपील करते नहीं देखा. वहां किसी इस्लामिक पैगम्बर  के अनुयायी को शांति के लिए मार्च निकालते नहीं देखा। सारे चर्च और मस्जिदें मौन क्योँ हैं. 

एक विचित्र द्विविधा में दिखते हैं दोनों।  आतंक का साथ दें  या युद्ध का। 

युद्धों के बीच मात्र तानाशाहों की क्रूरता , आतंक , भय ,मृत्यु और विनाश को अपनी भाषा बोलते देख रहा हूँ। 

यहाँ पर आकर दिखाई देता है कि नोबल पुरस्कार किस को और क्योँ दे दिऐ जाते हैं। 

आतंक और युद्ध किसकी भाषा है और शांति का नोबल किस प्रकार के लोगों की भाषा बोलने वालों को दिया  जाता है. 

गुरुवार, 7 दिसंबर 2023

 सुबह  - सुबह  पक्षियोँ के कलरव से नींद  खुली।  चाय पीकर बाहर निकला तो देखा कि खेतों ने घने  कुहरे की चादर  ओढ़ी है और ठण्ड हरियाली के पहरे में खड़ी  है।  बाहर निकलने का साहस नहीं  हो रहा था लेकिन समय के साथ  चलने के लिए कमरे से बाहर  निकला।  

धूप के निकलने के साथ ही कुहरा हवा में घुलने लगा और ठण्ड भी किरणों के रथ में बैठकर चली गई।   हरियाली निश्चिंत होकर अपनी आभा बिखेरने लगी घाटी के दोनों और की पहाड़ियां आकर खड़ी  हो गई।  

शीत ऋतु  में हर वर्ष कई प्रकार के नए - नए अतिथि पक्षी घर के आस पास आकर चहकने लगते हैं या कहूँ  कि मिलने आते हैं. 

उनका आना अच्छा लगता है।  मेरे मित्रों में वे भी प्रिय मित्र  हैं. 


गुरुवार, 23 नवंबर 2023

गुरुवार, 16 नवंबर 2023

समूचे विश्व में चल रहे युद्धों के कारण महाशक्तियों के अस्त्र शस्त्रों  के भण्डार लगभग खाली होने को हैं. और उन्नत हथियार बनाने को आतुर हैं और उनकी  संहारक क्षमता के  परीक्षण  भी हो रहे हैं. अनगनित बम गिराए जा रहे हैं. परमाणु युद्धों के बादल मंडरा कर लौट जा  रहे हैं. प्राणियों और सभ्यताओं के अस्तित्व संकट में हैं. पर्यावरण की तो बात ही व्यर्थ है.  महाशक्तियां ह्र्दय हीन/ संवेदनहीन हो रही  हैं. परमाणु युद्ध की संभावनाएं खोजी जा रही हैं, 


सारी  दुनियां के बुद्धिजीवी नाम के जीव मौन  हैं.  असहाय है. या अपनी जीविका के स्वार्थ में   व्यापक संहार की ओर से ऑंखें मूंदें हैं।  या युद्धों को महिमामण्डित कर रहे हैं. 
विश्व समुदाय बिल्कुल महाभारत  की पुनरावृत्ति की ओर बढ़ रहा है।   

महाविनाश की ओर  बढ़ती इस धरती पर हम इस धरती पर क्या बचाने  के लिए संघर्ष करें। 

बुधवार, 18 अक्टूबर 2023

 या  देवी सर्व भूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता , नमस्तस्यै नमस्तस्यै  नमो नमः , 

जिस धर्म के ग्रंथों ऐसा नारी को शक्ति स्वरूपा माना गया हो।  पत्नी के रूप में अर्धांगिनी माना  गया हो।  जिसके बिना हिन्दू धार्मिकों के पूजा आदि  कोई भी कार्य  अपूर्ण माने  जाते हैं. संसार जिसे जननी के रूप में मानता  है , जिसे बैभव की देवी लक्ष्मी माना  गया हो। जिसे विद्या की देवी सरस्वती माना  गया हो, जिसे असुरों के विनाश की देवी महाकाली माना गया हो  उस देश में नारी के लिए अबला शब्द कहाँ से आगया? 


शनिवार, 7 अक्टूबर 2023

 कल अष्टमी के श्राद्ध के साथ ही पिताजी को हमसे बिछड़े हुए एक वर्ष हो गया है।  

इन बारह महीनों मैं पिता जी ममत्व की  छत्र छाया  में व्यतीत अपने बचपन से लेकर उनके हमारे बीच उनके अंतिम दिन तक की यात्रा तक की पुस्तक को पुनः खोल कर देखा।  हर घटना से पुनः गुजरा।  

आज भी घर के हर कोने में उन्हें ढूंढता हूँ।  कभी लगता है वे दुकान में ग्राहकों से बातें कर रहे हैं।  उनकी आवाज कानों में गूंजती है। लेकिन वे कहीं दिखाई नहीं देते हैं।  

मंगलवार, 19 सितंबर 2023

 निशा शान्त अवश्य  होती है पर मौन नहीं।  तिमिर की कालिमा में दिनभर के सारे प्रश्न जाग उठते हैं. 

उनके प्रश्न जिनकी आवाज दिन को सुनाई नहीं देती है। दिन के  प्रकाश की चकाचौंध में जिनकी आवाज दब  जाती है अन्याय और शोषण के कोलाहल से भयभीत जो अपनी बात नहीं कह पाते रात्रि उनके क्रंदन से सो नहीं पाती।  उनके साथ बैठ कर उनकी बातें सुनती है शोषण और अन्याय की झकझोर देने वाली कहानियां उसकी चिन्ता बन जाती है।

रात्रि के आकाश में न्याय के लिए पुकारने की गूंजती आवाजों पर न्याय उसका उत्तरदायित्व होता है।   

शांत हृदय से कभी रात्रि में बाहर बैठ कर अँधेरे की सुंदरता का आनंद लें। 

जंगलों से आती उन सभी की मधुर आवाजों को सुनें जो दिन में नहीं बोल पाते। या दिन के कोलाहल में उनकी आवाज हम तक नहीं पहुँच पाती है  उनका बोलना एक सम्मोहक संगीत है जो सर्वत्र गूंजता रहता है।  रात्रि हमेशा सोने के लिए ही नहीं होती है।  अँधेरे का  रास्ता भोर के दिव्य प्रकाश के साथ दिन के उजाले की ओर जाता है।  किसी पहाड़ी के शिखर पर बैठकर कभी शांत मन से अँधेरे के साथ इस राह के यात्री बने।  

गुरुवार, 24 अगस्त 2023

 श्रावण  मास की सुहावनी  ऋतु  चल रही है।  अभी दो मास पहले गर्मी और वनाग्नि की घुटन से प्राणी मात्र त्रस्त  थे। 

वनाग्नि हर वर्ष की घटना होती  जा रही है। हर वर्ष जंगलों का जलना  भी हमारे जीवन के  एक आवश्यक घटना क्रम की तरह बन चुका  है। हर वर्ष महत्वपूर्ण जड़ीबूटियां, जंगल के छोटे छोटे पक्षी , चीटियां, कीट  पतंगे स्वच्छ हवा,जंगलों की मिटटी की नमी, शीतलता सब वनाग्नि की भेंट चढ़ जाते हैं. 

हम कुछ नहीं कर पाते  हैं. सिर्फ  दूर दूर तक जलते जंगलों को जलते देखते रहते हैं.

इस बार की बरसात भी भीषण विनाशकारी रूप में आई और यहाँ भी हम  प्रकृति के इस रौद्र रूप को मात्र देखते रहे। 

लेकिन यदि परमाणु यद्ध हुआ तो हम उस विनाश को भी देखते रहेंगे। यदि ये परमाणु युद्ध हमारे आसपास नहीं हुआ तो।  परमाणु युद्ध का रौद्र रूप के समक्ष तो प्राकृतिक विनाश कुछ भी नहीं है. 

आईये  दुनियां के परमाणु संपन्न तानाशाहों से पूछें  कि वे परमाणु युद्धों के बाद विश्व को कैसा देखना चाहते हैं. 

गुरुवार, 24 नवंबर 2022

हमारी  चिंताएं इस समय सम्पूर्ण  विश्व मेँ चल रहे युद्ध और युद्धों से उत्पन्न परिस्थितियां  हैं। हर ओर  व्यापक  हाहाकार मचा  हुआ है। विनाशक हथियारों  से  जीवन संकट में है. लोग अगले पल के जीवन की  आशा छोड़ बदहवाश से  भाग रहे  हैं , कोई देश छोड़  भाग रहा है तो  कोई घर  छोड़ सुरक्षित सुरक्षित स्थान की ऒर  दौड़भाग मचा रहा है महा विनाशक बमबारी के बीच भी   जीवन बचाने के लिए प्रयास कर  रहे हैं।  लेकिन दानव रूपी तानाशाह अपनी शक्ति के मद में चूर सब कुछ समाप्त करने को  आतुर है. 

मंगलवार, 22 फ़रवरी 2022

महाशक्तियों द्वारा युद्धों का वैश्विक विरोध हो

 नमस्कार 


विश्व को अहिंसा की आवश्यकता है  इसी में  मानवीय हित सुरक्षित हैं. मानवाधिकारों की रक्षा के लिए वैश्विक अभियान चलाएं। 

महाशक्तियां आज अपने घातक, संहारक व्यापक विनाशकारी हथियारों का प्रयोग कर उनकी संहारक क्षमता को प्रदर्शित करने को उतावली हैं  ऐसी स्थिति में भारत को ही शांति की पहल करने आगे आना होगा अन्यथा हिंसा का जो तांडव ये महाशक्तियां करने को उतावली हैं वह अब  तक की महा हिंसा होगी।  जिसमें दुनियां के मैदान शवों के लिए छोटे पड़ जायेंगे।  न कोई शवों को उठाने वाला होगा न कोई अपनों के लिए रोने वाला बचेगा।  सेनाओं के पास मात्र एक ही लक्ष्य होगा मारो और मारो जब तक अंतिम व्यक्ति जीवित है तब तक लड़ो।   संवेदनाएं ख़त्म हो जाएँगी।  

आइये युद्धों को रोकने के लिए पहल करें।  विश्व शांति की कामना करें।  बर्बर सत्ताधीशों  विरुद्ध दुनियां के शांतिप्रिय देश एकजुट हों. प्राणी मात्र को बचाने के लिए युद्धों का विरोध करें।  

संहारक अस्त्र शस्त्रों को नष्ट करने के लिए वैश्विक सहिंता बनाएं ।  

 संध्या के कितने रुप ?