बुधवार, 30 सितंबर 2009

याद नहीं स्वप्न

रात जो स्वप्न देखे वे पूरे याद नहीं रहे । आधे -अधूरे । जिनसे कोई संकेत नहीं पकडा जा सकता । आजकल मन्दिर का काम देख रहा हूँ तो सपने भी मन्दिर से ही सम्बंधित हो रहे हैं । लेकिनगावं मैं होने वाली भावी घटनाओं से उनका कुछ न कुछ संकेत तो है ही ।
दिन में घरेलू काम से फुर्सत मिलाने के बाद आफिस में बैठकर संस्था का काम देखा ।कल के लिए कार्यक्रम की रूप रेखा तय की ।

कल रातभर वर्षा होती रही।   इस वर्षा ने प्राकृतिक सौंदर्य में नए  प्राण डाल दिए हैं. बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही वातावरण में एक नयापन आ गया ...