शनिवार, 22 मई 2010

अभी अभी एक निमंत्रण से लौटा हूँ । आजकल निमंत्रणों की भरमार है । पिछले दिनों की वारिश से मौसम में कुछ तबदीली आई है । वर्ना इस वर्ष गर्मी से बुरा हाल होता ।
कुछ ख़ास नहीं लिख पाया । हिंद युग्म में कुछ कवितायें प्रकाशित हुई ।

कल रातभर वर्षा होती रही।   इस वर्षा ने प्राकृतिक सौंदर्य में नए  प्राण डाल दिए हैं. बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही वातावरण में एक नयापन आ गया ...