सोमवार, 28 सितंबर 2009

धूप में शब्द

धूप कहना चाह रही थी कि मैं धूप हूँ । और तुम छांह ढूंढ़ लो ।
लेकिन शब्द नहीं मान रहे थे । वे निकल पड़े चरवाहों के साथ । शब्द धूप में तपना चाहते थे ,वे सारी गर्मी/सारा तेज सोख लेना चाहते थे अपने भीतर , शब्द मेरी आंखों को देना चाहते थे तेज
दिन में सोच रहा था कि आज शाम को काफी लिखूंगा लेकिन खाना खाते ही पलकें भारी लगाने लगी । और ज्यादा देर तक कंप्यूटर पर बैठना नहीं हो सकेगा ।

कल रातभर वर्षा होती रही।   इस वर्षा ने प्राकृतिक सौंदर्य में नए  प्राण डाल दिए हैं. बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही वातावरण में एक नयापन आ गया ...