कोई और काम नहीं था सिवाय घर देखने के । सुबह उमा के साथ धान मानंने खेत में गया ,खेतों में काम करना मेरे लिए काफी आनंददायी काम है । खेतों में मैं प्रकृति के करीब होता हूँ पौंधों और मिट्टी से बातें कर सकता हूँ । हवा को सुन सकता हूँ । अपनी आंखों मैं भर सकता हूँ रंग पूरी प्रकृति के । रच सकता हूँ कोई तस्वीर मन के भीतर ।
खेत से लौटकर मैं सीधे अपने कम्प्यूटर कक्ष मैं आ गया । कुछ फाइलें चेक की । उमा मुझे कुछ घर के काम का निर्देश देकर फ़िर घास के लिए चली गई । मुझे उसके लौटने तक दिन के खाने की सारी तैयारी पूरी करके रखनी थी । खाना खा कर थोडी देर आराम करने के बाद वह फ़िर घास के लिए निकल गई . वह शाम तक बुरी तरह थक चुकी होती है । पहाड़ में औरतें बहुत मेहनत करती हैं । पूरे घर का बोझ उनके कन्धों पर टिका होता है । और ८०% आदमियों का भी । क्योंकि आदमी बाज़ार से शाम को दारु के नशे में धुत्त होकर घर पहुंचता है । दिनभर की थकी औरत को उसकी गालियाँ ,मार ,ताने और उसकी बुरी हालत को भी झेलना होता है ।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)
कल रातभर वर्षा होती रही। इस वर्षा ने प्राकृतिक सौंदर्य में नए प्राण डाल दिए हैं. बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही वातावरण में एक नयापन आ गया ...
-
महंगाई भले ही अरबपति मुख्यमंत्रियों /करोडपति मंत्रियों /उद्योगपतियों /नौकरशाहों /बड़े व्यापारियों के लिए कोई मायने नहीं रखती हो लेकिन बेरोज...
-
आज बुरी तरह थक गया हूँ । या बुखार आने वाला है । लेकिन सोऊंगा तो ब्लॉग लिखकर ही । कल मैंने लिखा था कि किसान को आर्थिक सुरक्षा देनी होगी । तभी...
-
सुबह का उगता सूरज दिन की कथा के शीर्षक की तरह है . इसलिए जरुरी है कि सुबह अच्छी हो . आशावादी हो दिन की कथा का शीर्षक . एक सुखद संगीत प...