मंगलवार, 23 मार्च 2010

अनुभव

कई दिन हो गए अपने ब्लॉग पर नहीं बैठे .लगा कि कुछ छूट गया । दिन में कई तरह के विचार आते जिन्हें तुरंत नोट कर लेना चाहिए था लेकिन जो छूट गया वो छूट गया । उसे उसी रूप में सहेजना फिर बहुत मुश्किल होता है । जैसे हम कई बार धूप से इतने प्रभावित हो जाते हैं कि कि धूपको लिखना चाहते हैं लेकिन शाम को धूप नहीं लिखी जा सकती । अनुभव में बहुत कुछ बयां करना छूट जाता या फिर कुछ बनावटी सा बन पड़ता है ।
सोचता हूँ कि जो निकल गया उसे छोड़ दूँ लेकिन फिर भी कुछ न कुछ यादों में सिमटा रहता है और उसे लिखे बगैर चैन नहीं ।

कल रातभर वर्षा होती रही।   इस वर्षा ने प्राकृतिक सौंदर्य में नए  प्राण डाल दिए हैं. बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही वातावरण में एक नयापन आ गया ...