मंगलवार, 11 अगस्त 2009
एक तरफ नींद लग रही है दूसरी तरफ़ ब्लॉग लिखने से स्वयं को नहीं रोक पा रहा हूँ । आज कई दिनों बाद पानी बरसा है तो एक उम्मीद जगी कि अभी हरा होगा .सूखे को देखते हुए तो लगता है कि कम से कम सतझड़ तो होने ही चाहिए तब कहीं जाकर श्रोत फूटेंगे . दिन मैं गाड़ी का कुछ काम कराया । एक चक्कर बंधू जी की दूकान तक गया । मासी के विकास के सम्बन्ध में कुछ चर्चा की । चाय पीकर लौट आया. कंप्युटर पर कुछ टाइपिंग का काम किया । और दिन इसी तरह निकल गया । उमा जी दूध लेकर आ गई दूध पीकर सो जाउंगा
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