बुधवार, 19 अगस्त 2009
लग रहा है कि आज लिखने के लिए कुछ ख़ास नहीं है । हर रोज लिखने के लिए होगा भी क्या ? समाचार लोग पढ़ ही लेते हैं -और अपनी -अपनी अभिरुचि के अनुसार समाचारों के अर्थ भी निकाल लेते हैं । फिर होती है तू-तू-, मैं -मैं , मारूं -मरुँ ,खबरों का असर बहुत तेजी से होता है लेकिन सकारात्मक कम और नकारात्मक बहुत अधिक । अभी कुछ देर पहले ही लाइट आयी है ।लाइट नहीं थी तो एक बार सो चुका था बिजली आयी तो नींद खुली और यहाँ आकर बैठ गया । दिन खाली -खाली सा गुजरा -बस एकाध मित्रों से मुलाक़ात कुछ इधर -उधर की गप्पें -धूप ,वारिश और महंगाई पर और कुछ नहीं ।किसानों और ग्रामीणों की पहली चिंता तो राशन पानी ही होती है मेरे बाज़ार से देरी से आने पर उमा जी का पारा थोडा चढ़ा हुआ है मनाना पड़ेगा। कुछ पृष्ट समयांतर के पढ़े
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