रविवार, 14 सितंबर 2025

 समूचे विश्व में युद्धों में मारे गए निर्दोष नागरिकों, सैनिकों, बच्चों , पशुओं, वृक्षों कीट पतंगों , व प्रकृति की हर संरचना के विध्वंश पर उन्हें श्रद्धांजलि।  

        क्रूर, अत्याचारी , सत्ता लोलुप तानाशाहों को धिक्कार। 






  आज स्वर्गीय पिताजी का श्राद्ध है।  तीन  साल हो गए हैं. आज भी लगता है कि  पिताजी यहीं कहीं आस - पास हैं, उनकी ममता एवं छत्र छाया में व्यतीत जीवन मेरे भविष्य की सुदृढ़ नींव है । आप जहाँ भी हैं आपको दण्डवत नमन।

कल रातभर वर्षा होती रही।   इस वर्षा ने प्राकृतिक सौंदर्य में नए  प्राण डाल दिए हैं. बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही वातावरण में एक नयापन आ गया ...