दिन मैं एक चक्कर चौखुटिया गया .चौखुटिया मासी के बीच सड़क की हालत बहुत ही ख़राब है सरकारी काम का आलम यह है की पिछले आठ सालों से बारह किलोमीटर की सड़क पर डामर नहीं हो पा रहा है लोग बहुत परेशान हैं । यदि किसी किमी पर काम हो रहा है तो इतना घटिया कि एक तरफ़ से बन रहा है तो आगे बढ़ने तक पीछे का बना हुआ टूट जा रहा है । मासी पहुँचने के बाद सुकून मिलता है कि ठीक- ठाक घर पहुँच गए ।
कुछ देर कंप्युटर पर काम किया । मेल देखी। शाम के समय बाज़ार गया, बंधू जी , चंदू भाई से होता हुआ श्री राजेंद्र सिंह जी के घर तक गया । वहाँ कुछ अन्य मित्र गण भी बैठे थे । इस वारिश से बहुत टूट-फूट हो गई है । किसीका मकान टूटा तो किसी के खेत की दीवाल टूटी
कहीं पहाड़ खिसक कर रोड पर आए तो किसी के मकान के ऊपर । कई जगह से मकान पर पहाडी से खिसक कर आए मलवे के नीचे लोगों के दब कर मरने के समाचार अखबारों में छपी है ।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)
कल रातभर वर्षा होती रही। इस वर्षा ने प्राकृतिक सौंदर्य में नए प्राण डाल दिए हैं. बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही वातावरण में एक नयापन आ गया ...
-
महंगाई भले ही अरबपति मुख्यमंत्रियों /करोडपति मंत्रियों /उद्योगपतियों /नौकरशाहों /बड़े व्यापारियों के लिए कोई मायने नहीं रखती हो लेकिन बेरोज...
-
आज बुरी तरह थक गया हूँ । या बुखार आने वाला है । लेकिन सोऊंगा तो ब्लॉग लिखकर ही । कल मैंने लिखा था कि किसान को आर्थिक सुरक्षा देनी होगी । तभी...
-
सुबह का उगता सूरज दिन की कथा के शीर्षक की तरह है . इसलिए जरुरी है कि सुबह अच्छी हो . आशावादी हो दिन की कथा का शीर्षक . एक सुखद संगीत प...