कल अल्मोड़ा गया था । देर होने के कारण रात वहीं रूक गया था । जगदीश पाण्डेय जी के कमरे में रहा । देर रात तक क्षेत्रीय राजनीति पर चर्चा की । दिन में अहा जिंदगी पत्रिका खरीदी ,पत्रिका अच्छी लगती है , समकालीन पत्रिकाओं में सबसे अलग है । स्तरीय भी ।
खाना खाकर सोने की सोच रहा था लेकिन मुन्नू,कुन्नू और दिप्पी की धमा चौकड़ी ने सोने ही नहीं दिया तो उठ कर कंप्युटर पर बैठ गया तो यहाँ बिल्ली आकर गोद में बैठ गई और काम नहीं करने दिया । मैंने चुपचाप बाज़ार निकलने में ही भलाई समझी । कुछ दोस्तों से मिला फिर अपने अड्डे पर आगया यानी बंधू जी की दूकान -चर्चाओं और निष्पक्ष-बेवाक बहस का केन्द्र ।
धूप के लौटने की तरह में भी शाम होते-होते घर लौट आया । उमा रुकी हुई थी की मैं गाय दुहने में उसकी मदद के लिए आऊं। खुबसूरत सांझ कुछ देर बाहर खड़ी रही और फिर न मालूम कब चली गई ।
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