रविवार, 13 सितंबर 2009

प्रेम की भाषा का जवाब

दिन बेकार -सा गया । यूँ तो करने को कुछ ख़ास नहीं था फ़िर भी कुछ काम करने बैठो तो बच्चों का उधम । परेशान होकर सोने जाओ तो बच्चे वहाँ भी नहीं छोड़ते ।बहुत सुखद है बाल लीला । लेकिन एक घंटे मैं दिमाग का भुजिया बना कर रख देते हैं ।और एक घंटे बाद दिमाग किसी काम का नहीं रहता । सिर्फ़ कुछ घरेलू काम किए । फूलों की छंटाई की । गाय और बछड़े को नहलाया -धुलाया । फूलों से बात करो तो फूल बातें करने लगते हैं . गाय से बातें करो तो गाय बातें करने लगती है . बिल्लियों से बातें करो तो बिल्लियाँ बातें करने लगती है प्रेम की भाषा का जवाब भी प्रेम से ही मिलता है । दादी जी का श्राद्ध था ।पिताजी ने श्राद्ध किया । उमा खाना खाकर घास लेने चली गई कुछ देर श्री नंदकिशोर मासीवाल और श्री प्रताप राम जी के साथ बैठ कर क्षेत्रीय विकास के सम्बन्ध पर चर्चा की । एक बार सोच रहा था कि बाज़ार घूम आऊं फिर सोचा कि खाली बाज़ार जाकर भी क्या करूँगा बच्चे सो गए तो मैं कम्प्यूटर पर बैठ गया । और शाम तक काम करता रहा ।

कल रातभर वर्षा होती रही।   इस वर्षा ने प्राकृतिक सौंदर्य में नए  प्राण डाल दिए हैं. बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही वातावरण में एक नयापन आ गया ...