गुरुवार, 1 अक्टूबर 2009
जीवन की रिक्तता
असोज का महीना क्या लगा कि घर के काम में उलझ कर रह गया हूँ -यह भी एक अनुभव है . दिन भर काम करने के साथ -साथ यह भी सोचना होता है कि आज ब्लॉग पर क्या लिखूं । हमारे जीवन में हर रोज कुछ न कुछ ऐसा घटित होता है कि हमें वह पल याद रहता है और हम कुछ दिन तक अपने मित्रों से उस बात का जिक्र करते हैं । वह एक सुखद या दुखद स्वप्न भी हो सकता है । या एक रिक्तता -जिसका जिक्र भी बहुत महत्व का होता है । कुछ लोग खालीपन से भागते हैं ,जबकि कुछ ऐसे भी हैं जो अपने जीवन के खाली स्थान को सुरक्षित रखना चाहते हैं । ताकि जिंदगी की भाग -दौड़ से उबने के बाद अपनी जिंदगी के खाली कमरे में आ कर कुछ पल आराम से बिताये जा सकें और इस रिक्तता से नई ऊर्जा प्राप्त की जा सके । यह रिक्तता आत्ममंथन की प्रेरणा देती है हमें चिंतन का अवसर मिलता है । और हम इत्मीनान से पीछे और आगे देख सकते हैं । अपने रास्ते तय कर सकते हैं । यह खालीपन फूलों की सुगंध से भरा होना चाहिए ।
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