सोमवार, 2 अगस्त 2010

हरे सपनों का संसार

हरी भरी धरती जीवन में उत्सव की तरह है ।
हम इस रंग से बहुत उत्साहित होते हैं । और चाहते हैं कि इस हरियाली को हम दीर्घजीवी होकर देखते रहें । इसमें हमारा अतीत भी है और भविष्य भी । स्वप्न भी सच्चाई भी ।
एक सुखद अनुभव भी ।
मैं चाहता हूँ इस हरियाली को अपने रोम -रोम में उगा लूँ , सपनों में सहेज कर रख लूँ । थोड़ा धूप , थोड़ा बादल और थोड़ा पानी अपने भीतर जमा कर लूँ ।
ताकि मेरे भीतर भी हरियाली हमेशा रहे ।

कल रातभर वर्षा होती रही।   इस वर्षा ने प्राकृतिक सौंदर्य में नए  प्राण डाल दिए हैं. बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही वातावरण में एक नयापन आ गया ...