सुबह से इंतज़ार कर रहा हूँ कि कब बारिश हो । लेकिन बादलों को तो जैसे बूंदें गिराने में डर लग रहा है ।
इस मौसम में बारिश चाहिए ।
गधेरे/श्रोत /नदियाँ सूखने के कगार पर हैं । फसल को बारिश का इंतज़ार है । फूलों को भी अपने रंग बिखेरने के लिए बारिश चाहिए ।
बारिश में ही तन और मन भी भीगेगा ।
भीतर कहीं एक आग भी लगेगी ।
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