मंगलवार, 6 जुलाई 2010


दो दिनों से लगातार बारिश से धरती नहा रही है । और निखरती जा रही है । हरियाली का यह रूप सम्मोहक है । मन को अनूठी शांति मिलती है .पहाड़ों की घाटी हो या शिखर या आकाश । यह बदलाव हमारे मन के भीतर नयी ऊर्जा और ताजगी देता है । नदी- नाले, गाड़-गधेरे सब पानी से भर गए हैं , अभी कुछ दिनों पहले की पानी की त्राहि -त्राहि मची थी .और आज तो लगता ही नहीं कि पांच दिन पहेले इतना भयानक सूखा पड़ा था ।
सुबह अल्मोड़ा जाने की तयारी की थी लेकिन बारिश को देखते हुए फिर कार्यक्रम बदल दिया ।
कमरे में बैठ कर पुराने कागज छांटे कमरे की सेटिंग बदली कुछ रुका हुआ काम किया और मौसम का पूरा आनंद लिया । इत्मीनान से बारिश में भीगा ।
बारिश को अभी भी चैन नहीं । लेकिन जमीन को अभी लगभग चार दिन-रात बारिश चाहिए ।

कल रातभर वर्षा होती रही।   इस वर्षा ने प्राकृतिक सौंदर्य में नए  प्राण डाल दिए हैं. बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही वातावरण में एक नयापन आ गया ...