वर्तमान में पूरे विश्व में युद्ध के काले बादल छंटने का नाम ही नहीं ले रहे, आम नागरिक भय और हताशा के साये में जी रहे हैँ. युद्ध के मैदान महाशक्तियों के अस्त्र शस्त्रों की प्रयोशाला बन गए हैं. महाशक्तियां पूरी दुनियां में भय का वातावरण बनाये हुए हैँ. वे दिखाना चाहती हैं कि उनके देश के नागरिकों के आलावा बाकी देशों के नागरिकों का जीवन मृत्यु वे तय करेंगे. वे जब चाहे शहर के शहर को मिट्टी में मिला सकते हैं. और बाकी देश और यूनाइटेड नेशन सिर्फ देख सकते हैँ. अत्याचार के खिलाफ कोई देश नहीं बोलेगा. हिंसा अहिंसा महाशक्तियां नहीं जानती. वे सिर्फ मारना और निर्बल देशों को तबाह करना या अपना गुलाम बनाना जानती हैँ. महाशक्तियों के लिए मानवीय मूल्य कोई मायने नहीं रखते.
दूसरों के जीने के अधिकार समाप्त करना, प्रकृति एवं प्राकृतिक संरचनाओं को तहस नहस करना महाशक्तियों का सबसे नित्कृष्टतम कृत्य है इनका वैश्विक विरोध होना चाहिए.
युद्ध बंद हों. पृथ्वी पर प्राणी जीने के लिए आये हैँ मार दिए जाने के लिए नहीं.


















