शाम का वक़्त कंप्युटर पर बीता ,मूड ठीक नहीं था तो गाड़ी लेकर जाना उचित नहीं समझा । सुबह राखी का त्यौहार बच्चों ने खुशी के साथ मनाया .कुछ देर छत में जाकर चाँदनी रात का लुत्फ़ लिया काश इस वक़्त लाइट चली जाती तो चाँदनी में मौन /गंभीर अँधेरा पहाडिओं में पसरा दिख जाता दिन की यादों को अपने सीने में छुपाये हुए । यह बात अलग थी कि लोगों को थोड़ा परेशानी होती लेकिन इस गर्मी में बाहर निकल कर पहाडिओं के बीच अंधेरे का लुत्फ़ भी लेते ।
दिन आया और मेरी जिंदगी से होता हुआ निकल गया । अब रात की बारी है आंखों से होते हुए आयगी स्वप्नों से होते हुए निकल जायगी
बुधवार, 5 अगस्त 2009
अभी अभी गावं से लौटा हूँ । सूखा और लोगों की चिंताएँ देखी,इतने भयंकर रूप से गर्मी और अवर्षा पहले कभी नहीं देखी । यह तो चतुर मॉस का हाल है .बाद के महीनों मैं क्या होगा ?एक और आश्चर्य कि जंगलों मैं पेड़ कम होते जा रहे हैं । यानी कि जंगलों की सघनता कम होती जा रही है यह मैंने कई जंगलों मैं देखा है । इसीलिए जंगलों की नमी भी ख़त्म होती जा रही है श्रोत सूखते जा रहे हैं । जिसका असर गधेरों और अंततः नदियों पर पड़ रहा है इस सब को देखते हुए प्रतीत होता है कि हमारी नदियों का अस्तित्व भी खतरे मैं है ।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)
कल रातभर वर्षा होती रही। इस वर्षा ने प्राकृतिक सौंदर्य में नए प्राण डाल दिए हैं. बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही वातावरण में एक नयापन आ गया ...
-
महंगाई भले ही अरबपति मुख्यमंत्रियों /करोडपति मंत्रियों /उद्योगपतियों /नौकरशाहों /बड़े व्यापारियों के लिए कोई मायने नहीं रखती हो लेकिन बेरोज...
-
आज बुरी तरह थक गया हूँ । या बुखार आने वाला है । लेकिन सोऊंगा तो ब्लॉग लिखकर ही । कल मैंने लिखा था कि किसान को आर्थिक सुरक्षा देनी होगी । तभी...
-
सुबह का उगता सूरज दिन की कथा के शीर्षक की तरह है . इसलिए जरुरी है कि सुबह अच्छी हो . आशावादी हो दिन की कथा का शीर्षक . एक सुखद संगीत प...