बुधवार, 23 दिसंबर 2009
हर पल एक नया रंग
सुबह से ही बहुत व्यस्त था .दिनु की लड़की हुई है . भतीजी हुई है ताऊ बन गया हूँ । एक अद्भुत अनुभव ।ताऊ बनने का ।मुझे अपने ताऊ याद आ गए । कुछ देर संस्था का कार्य किया । फिर टेक्सी चलाई .और फिर वापस आकर धूप सेंकने बैठ गया दिन में धूप में बैठा देख रहा था कि किरणें पहाड़ों को हर पल एक नए रंग से रंग रही थी । पहाड़ हर पल अपनी आभा बदलते जा रहे थे । लग रहा था कि हम सब प्रकृति के केनवास के चित्र हैं । ऐसे चित्र जिनके भीतर भी एक केनवास है जिसमें कि हमें हर पल रंग भरना है यह हम पर निर्भर करता है कि हमकिस तरह के चित्र बनाते हैं कैसा रंग भरते हैं ।
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