गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

गावं

आज घर पर ही था । कार्यालय में बैठकर कुछ काम निबटाये । पिछले कई दिनों से लगातार गावों के भ्रमण पर था ।
गावों को बहुत करीब से देखने का मौका मिला ।
गावं और पहाड़ -घाटियाँ मुझे बचपन से ही बहुत लुभाते हैं ।
संस्था के गठन के साथ ही पहाड़ के दूर दराज की जिंदगी को बहुत करीब से देखा । लोग बहुत कठिन जीवन जीते हैं ।
कठिन श्रम ! लेकिन कठिन श्रम के बाद भी आर्थिक रूप से काफी पीछे हैं । शिक्षा और जागरूकता का स्तर अभी बहुत पीछे है। आश्चर्य कि स्कूलों में लगभग सभी अध्यापक स्थानीय होते हैं। यानि सभी शिक्षक स्थानीय होने के नाते जिम्मेदार भी होने चाहिए । लेकिन ऐसा नहीं है। शिक्षा तो जैसे इन स्कूलों पर आकर थम जाती है । छात्रों का विकास यहीं से अवरुद्ध होना शुरू हो जाता है । एक गावं का परिचय वहां के बच्चे दे देते हैं । आप उनसे कुछ बोलो मत, कुछ पूछो मत. बस उनकी गतिविधियाँ देखते रहो ।
फिर भी पहाड़ के लोग बुद्धिमान , एकांत ,और शांत प्रिय लोग होते हैं ।

कल रातभर वर्षा होती रही।   इस वर्षा ने प्राकृतिक सौंदर्य में नए  प्राण डाल दिए हैं. बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही वातावरण में एक नयापन आ गया ...