सोमवार, 10 अगस्त 2009

पिछले दो -तीन दिन से नेट काम नहीं कर रहा था । इसलिए अपना ब्लॉग पोस्ट नहीं कर पाया । कल अल्मोडा गया था . दूर से शहर बहुत खुबसूरत दिखता है लेकिन नजदीक जाने पर दिखाई देता है कि पूरा पहाड़ काट- काट कर मकान बनाए जा रहे हैं भविष्य में भूमि धसान का भयंकर खतरा स्पष्ट दिखाई दे रहा है सरकार के पास पहाडों में शहर बसाने का कोई वैज्ञानिक तरीका नहीं दिखाई दे रहा है । उदाहरण के लिए पहाडों पर जब सड़क बनाई जाती है तो पहाड़ काट कर सड़क बनाए जाने के बाद सड़क के ऊपर का हिस्सा धंस कर नीचे आ जाता है इसी तर्ज पर पहाड़ का हर शहर खतरे की ज़द में है । भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार को पहाडों पर मकान बनाने के लिए कुछ वैज्ञानिक मानक तय करने चाहिए । इसी प्रकार शहर के गंदे पानी के निकास की बात है शहर का गंदा पानी पहाडी ढलानों /गधेरों से होते हुए सीधे नदियों में मिलता है इस प्रकार नदियाँ भी प्रदूषित हो रहीं हैं जबकि नदियाँ पहाडों की जीवन रेखा हैं । क्योंकि श्रोत सूखते जा रहे हैं और पहाडों के वाशिंदों की नदियों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। ऐसे हालत में नदियों को प्रदूषणमुक्त करने के प्रयास तत्काल किए जाने चाहिए । वरना प्रदूषित पानी पीने से होने वाले नुकसानों व् प्रदूषित नदियों के मछलियाँ खाने से होने वाले रोगों का सामना करना पडेगा ।

कल रातभर वर्षा होती रही।   इस वर्षा ने प्राकृतिक सौंदर्य में नए  प्राण डाल दिए हैं. बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही वातावरण में एक नयापन आ गया ...