शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

रंगों का मेला

मौसम के अनुसार सुबह अपनी रंगत बदलने लगी है । हल्की सी ठंडक , हल्का -हल्का कोहरा , कुछ ओस की बूंदें और धीरे -धीरे धूप का आना । बदलते महीने के साथ मौसम का बदल रहा है
कुदरत का यह मिजाज बहुत मन भावन लगता है ।

यह यादों के लौट आने का मौसम है !
जब हमें उम्मीद रहती है किसी के आने की तो लौट कर आती हैं सिर्फ यादें ।
ठण्ड के साथ । ठण्ड की तरह

लौट कर आने लगे हैं फूलों के रंग । जंगलों में हरी घास के साथ कई तरह के फूल अपने -अपने रंगों में खिल आए हैं । यूँ लगा कि कुदरत के मेले में सब पौंधे अपने -अपने रंगों की दुकान ले आए हैं । इन खुबसूरत जंगलों से जाने की इच्छा ही नहीं होती है। कौन सा रंग ले जाऊ ? किस रंग से खुश होगी प्रियतमा ?
बहुत सुन्दर है यह रंगों का मेला । तरह -तरह के रंग हैं , सुख के रंग ,दुःख के रंग।
सबसे सुन्दर रंग है प्रीत का रंग ।

कल रातभर वर्षा होती रही।   इस वर्षा ने प्राकृतिक सौंदर्य में नए  प्राण डाल दिए हैं. बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही वातावरण में एक नयापन आ गया ...