शुक्रवार, 14 अगस्त 2009
दिन मैं थोड़ा वारिश हुई एक ओखली पानी जितनी . हरियाली थोड़ा बढ़ेगी। एक चक्कर परथोला गया प्रधान श्री गुसाई राम जी से संस्था से सम्बंधित काम था । लौट कर कुछ देर बंधू जी के साथ बैठा ,उसके बाद श्री राजेन्द्र सिंह जी के साथ बैठकर चाय पी । बाज़ार में जन्माष्टमी के मेले की भीड़ लगनी शुरू हो चुकी थी ऑफिस में बैठकर कुछ काम निपटाया । मेला भी लोगों के मेल मिलाप का एक अच्छा ज़रिया है । कहाँ -कहाँ के नए-पुराने मित्र अचानक मिल जाते हैं । फिर नमस्कार पुरस्कार के बाद शुरू होता है यादों को दोहराने -बांटने का सिलसिला । शाम को बाज़ार की तरफ़ निकला लौट कर उमा के साथ चाय पी ।
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