बुधवार, 5 अगस्त 2009
अभी अभी गावं से लौटा हूँ । सूखा और लोगों की चिंताएँ देखी,इतने भयंकर रूप से गर्मी और अवर्षा पहले कभी नहीं देखी । यह तो चतुर मॉस का हाल है .बाद के महीनों मैं क्या होगा ?एक और आश्चर्य कि जंगलों मैं पेड़ कम होते जा रहे हैं । यानी कि जंगलों की सघनता कम होती जा रही है यह मैंने कई जंगलों मैं देखा है । इसीलिए जंगलों की नमी भी ख़त्म होती जा रही है श्रोत सूखते जा रहे हैं । जिसका असर गधेरों और अंततः नदियों पर पड़ रहा है इस सब को देखते हुए प्रतीत होता है कि हमारी नदियों का अस्तित्व भी खतरे मैं है ।
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