रविवार, 14 दिसंबर 2025

हम प्रतिदिन  जितने लोगों या जीव जंतुओं से मिलते हैं सबके भीतर सैकड़ों कहानियां होती हैं सुख और दुःख की।  हर पल जीवन में एक नया शब्द जोड़ जाता है। लेकिन विषय वस्तु सभी की लगभग समान  होती है। सुख या दुःख।  तीसरा रूप कहीं दिखता नहीं।  जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त हर व्यक्ति के जीवन में  कहानियों का  जाल ,ताना बाना  सुख दुःख के  शब्दों  से बुने  होते हैं ।  

हर व्यक्ति अपनी कहानी सुनाना  चाहता है।  वह चाहता है कि मेरी कथा - व्यथा सुनी जाय । मेरा सुख और मेरा दुःख दूसरों की तुलना में कितना बड़ा है। कितने  लोग हैं जिनकी कथा व्यथा  समान है।  


हम हर रोज जो भी नया ढूंढते हैं वह सुख या दुःख होता है।  शब्द अलग हो सकते हैं। 

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