तीन दिन की लगातार वारिश के बाद आज धूप ,प्रकृति मैं एक नई ताजगी छा गई है। जो सृजन को नई ऊर्जा देती है । परसों रात देर तक पाली रहा यहाँ से सूर्यास्त का दृश्य बहुत रमणीक लगता है और साँझ को तो रोक लेने को मन करता है यहाँ के सूर्यास्त के पलों मैं ख़ुद को भी भुलाया जा सकता है ।
मंगलवार, 18 अगस्त 2009
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