आज स्वर्गीय पिताजी का श्राद्ध है। तीन साल हो गए हैं. आज भी लगता है कि पिताजी यहीं कहीं आस - पास हैं, उनकी ममता एवं छत्र छाया में व्यतीत जीवन मेरे भविष्य की सुदृढ़ नींव है । आप जहाँ भी हैं आपको दण्डवत नमन।
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