समूचे विश्व में युद्धों में मारे गए निर्दोष नागरिकों, सैनिकों, बच्चों , पशुओं, वृक्षों कीट पतंगों , व प्रकृति की हर संरचना के विध्वंश पर उन्हें श्रद्धांजलि।
क्रूर, अत्याचारी , सत्ता लोलुप तानाशाहों को धिक्कार।
आज स्वर्गीय पिताजी का श्राद्ध है। तीन साल हो गए हैं. आज भी लगता है कि पिताजी यहीं कहीं आस - पास हैं, उनकी ममता एवं छत्र छाया में व्यतीत जीवन मेरे भविष्य की सुदृढ़ नींव है । आप जहाँ भी हैं आपको दण्डवत नमन।