शनिवार, 13 फ़रवरी 2010
कल लिखना आधे में ही बंद करना पड़ा । बच्चों ने एकाग्रता भंग कर दी । एक यात्रा( चाहे वह छोटी हो या बड़ी ०) में कुछ बहुत देख सकते हैं । बहुत दूर तक हमारी नजर जा सकती है और बहुत कुछ अपने भीतर समेत सकते हैं । यात्रा का एक मकसद यह भी है कि हम नया क्या देख पाते हैं । मैं जो जिंदगी देखता गया वह मेरे रोजमर्रा की दिनचर्या से बिलकुल अलग थी । लोगों के चेहरों से परेशानियाँ और खुशियाँ, क्रोध और प्रेम हम चलते -चलते देख सकते हैं । जिंदगी कहीं दौड़ रही है तो कही एक घुटन भरे कमरे में कैद है। बच्चों का एक व्यवसाय देखा कूड़ा बीनना ,यह समाज के लिए एक बड़ी दुखद घटना है। कि संवेदनहीन लोग इन्हें बुरी तरह फटकारते हैं । इनके लिए यह काम भी एक मानसिक प्रताड़ना झेलने वाला जोखिम का काम है ।
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