छ: तारीख से लगातार बर्षा से चारों ओ़र गहरी हरियाली छा गई है । रामगंगा अपने उफान पर है ।ओह! इतना डरावना उफान । इतनी विशाल नदी को देखकर लगता ही नहीं इस नदी के अस्तित्व को कोई खतरा है लेकिन मई -जून में तो बारिश न होने के कारण इसके भविष्य को लेकर चिंता होने लगी थी ।इसका पानी बिल्कुल सूख चुका था । लोग बे हिसाब मछलियाँ नदी से उठा -उठा कर ले गए ऐसा पहले कभी नहीं देखा । इस बारिश से रास्तों के दोनों ओर कमर कमर तक लम्बी घास उग आई है खेत /जंगल सब हरे भरे हो गए हैं लगभग सभी गधेरों में पानी बहने लगा है काश! धरा का यह हरित कालीन सदाबहार होता । इन गाड़ गधेरों का पानी बारहों मॉस इसी तरह भरा पूरा बहता रहता तो पहाड़ से पलायन आधा रूक जाता। लोग इस पानी और जमीन से अपने लिए सोना उगाते ।
अभी इस अंधेरे में बहार बर्षा की पायल बज रही है -छम्म -छम्म! अँधेरा इतना सुहावना भी होता है ? मन करता है कि इस सुंदर अंधेरे में घुमने निकलूं और उड़ान भरूं मन के आकाश में ।
शुक्रवार, 11 सितंबर 2009
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