कभी -कभी मैं सोचता कि कुछ भी न लिखना ही बेहतर होता है । पन्ने को यूँ ही छोड़ देना अच्छा लगता है । कोई शब्द न हो । कोई आकृति न हो ।
आश्चर्य !कि लोग उसमें से भी अपने विचारों के अनुसार सामग्री पढ़ने की कोशिश करते हैं । यानि कि पन्ना कोरा नहीं रहता । आकाश बिल्कुल खाली रहने के बाद भी लोग आकाश में अपना कोई कोना तलाशते हैं ।
अपने विचारों के लिए कोई सितारा तलाशते हैं । खाली आकाश से बातें करते हैं । या मौन होकर आकाश को एकटक निहारते हैं । तारों के बीच देखने की कोशिश करते हैं अपने बिछुड़े हुए प्रिय जनों को ।
लोग खाली पन्नों की किताब को सहेज कर रखते हैं । क्योंकि उसमें दर्ज किया जा सकता है जीवन --मृत्यु पर्यंत ।
लेकिन बहुधा खाली पन्नों की किताब खाली ही रह जाती है।
सोमवार, 25 जुलाई 2011
शनिवार, 2 जुलाई 2011
हरियाली है तो जीवन है .
आज पूरा दिन हरियाली की किताब पढ़ता रहा । पिछले तीन -चार दिनों की बारिश के बाद आज चटख धूप थी । धरती के सारे रंग एक नयी आभा से चमक से गए थे ।
आँखों के सामने पहाड़ों में फैली हरियाली थी । जिनमें से पढ़नी थी कथाएं अतीत की । और कथाएं अपने चारों ओर बिखरी लोगों की दिनचर्या की ।
खेतों और हरियाली / अनाज की पौंध से कितना प्यार करती हैं महिलाएं । सब कुछ भूलकर खेतों में रोपाई करने में व्यस्त हैं । कभी बारिश झम्म से आकर उन्हें भिगो जाती है तो कभी धूप गरमी से त्वचा जलने को तैयार रहती है । लेकिन ममता तो ममता है । धान हैं तो सपने हैं । हरियाली है तो जीवन है / प्यार है ।
हरियाली है तो आशा है ।
उमंग है ।
और हैं सपने ।
आँखों के सामने पहाड़ों में फैली हरियाली थी । जिनमें से पढ़नी थी कथाएं अतीत की । और कथाएं अपने चारों ओर बिखरी लोगों की दिनचर्या की ।
खेतों और हरियाली / अनाज की पौंध से कितना प्यार करती हैं महिलाएं । सब कुछ भूलकर खेतों में रोपाई करने में व्यस्त हैं । कभी बारिश झम्म से आकर उन्हें भिगो जाती है तो कभी धूप गरमी से त्वचा जलने को तैयार रहती है । लेकिन ममता तो ममता है । धान हैं तो सपने हैं । हरियाली है तो जीवन है / प्यार है ।
हरियाली है तो आशा है ।
उमंग है ।
और हैं सपने ।
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