आज सुबह टी वी पर कामन वेल्थ खेलों का संगीत देखा , बेहद शर्मनाक प्रस्तुति थी ।भारतीय शास्त्रीय संगीत के सन्दर्भ में तथा भारतीय शास्त्रीय नृत्य के सन्दर्भ में बेहद निराशाजनक स्थिति लगी । भारतीय संस्कृति तथा सैकड़ों क्षेत्रीय संस्कृतियों के इस देश में क्या परोसने के लिए कुछ नहीं था । रहमान साहब को क्या यह नहीं बताया गया था कि कामन वेल्थ खेल भारत में हो रहे हैं ।
यह सरकार को धिक्कारने का विषय है ।
भारत के किसी भी कोने से कुछ भी लिया होता तो गर्व का विषय होता ।
स्पष्ट होता है कि संसद में कैसे लोग बैठे हैं ।लगता है कि आत्म सम्मान के खेल में हम खेलने से पहले ही हार गए हैं । खेलों में घोटालों के महा खेल के बारे में तो खेलों के बाद ही मामला साफ़ होने के बाद कुछ कहा जा सकेगा । जब धुआं उठा है तो आग भी जरुर लगी होगी।
आज कई दिनों बाद आसमान साफ़ देखा । जमीन पानी से पूरी तरह भर चुकी है । नदी नाले भरे हुए हैं यह बारिश कई बरसों बाद हुई है । हालाँकि काफी जान माल का नुक्सान हुआ .बहुत लोगों ने अपनों को खोया यह बारिश उनके लिए कहर बनकर बरसी । फिर भी धरती के लिए यह बारिश अमृत की तरह थी ।
यह धूप भी अमृत की तरह लग रही है ।
मंगलवार, 31 अगस्त 2010
गुरुवार, 26 अगस्त 2010
हरा मौसम
आज काफी दिनों के बाद अपने ब्लॉग पर बैठा हूँ एक अजीब -सी उधेड़बुन में हूँ कि क्या लिखूं और क्या न लिखूं ? बरसात अपनी हद से आगे निकल कर सब कुछ तहस नहस करने पर आमादा है । कभी पहाड़ सूख रहे थे और अब जगह-जगह पहाड़ धंस रहे हैं । लगता है कि पहाड़ों पर बना हर मकान खतरे की जद में है ।
यह सब अनियंत्रित निर्माण का नतीजा है ।
दिन बहुत व्यस्त रहा । दोपहर बाद कमरे से बाहर निकलने का समय नहीं मिला । कुछ प्रधान लोग आये थे । उनके साथ बातों में रह गया । शाम को बाहर निकल कर कुदरत का नजारा देखा । हरियाली धरती पर बिछ गयी है ,। एक हरे कालीन की तरह ,जिस पर चलते हुए हरे सपने देखे जा सकते हैं ।
यह मौसम प्यार का है । और इसे सहेज कर रखा जा सकता है।
बादलों को देखा । अभी पानी से भरे आकाश में घूम रहे थे लग रहा था कि बरसने के लिए जगह तलाश रहे हों ।
कई दिनों से पुराने सूख चुके झरनों को फिर झरते देखा ।लगता था कि दूध के झरने हैं ।
यह सब अनियंत्रित निर्माण का नतीजा है ।
दिन बहुत व्यस्त रहा । दोपहर बाद कमरे से बाहर निकलने का समय नहीं मिला । कुछ प्रधान लोग आये थे । उनके साथ बातों में रह गया । शाम को बाहर निकल कर कुदरत का नजारा देखा । हरियाली धरती पर बिछ गयी है ,। एक हरे कालीन की तरह ,जिस पर चलते हुए हरे सपने देखे जा सकते हैं ।
यह मौसम प्यार का है । और इसे सहेज कर रखा जा सकता है।
बादलों को देखा । अभी पानी से भरे आकाश में घूम रहे थे लग रहा था कि बरसने के लिए जगह तलाश रहे हों ।
कई दिनों से पुराने सूख चुके झरनों को फिर झरते देखा ।लगता था कि दूध के झरने हैं ।
सोमवार, 2 अगस्त 2010
हरे सपनों का संसार
हरी भरी धरती जीवन में उत्सव की तरह है ।
हम इस रंग से बहुत उत्साहित होते हैं । और चाहते हैं कि इस हरियाली को हम दीर्घजीवी होकर देखते रहें । इसमें हमारा अतीत भी है और भविष्य भी । स्वप्न भी सच्चाई भी ।
एक सुखद अनुभव भी ।
मैं चाहता हूँ इस हरियाली को अपने रोम -रोम में उगा लूँ , सपनों में सहेज कर रख लूँ । थोड़ा धूप , थोड़ा बादल और थोड़ा पानी अपने भीतर जमा कर लूँ ।
ताकि मेरे भीतर भी हरियाली हमेशा रहे ।
हम इस रंग से बहुत उत्साहित होते हैं । और चाहते हैं कि इस हरियाली को हम दीर्घजीवी होकर देखते रहें । इसमें हमारा अतीत भी है और भविष्य भी । स्वप्न भी सच्चाई भी ।
एक सुखद अनुभव भी ।
मैं चाहता हूँ इस हरियाली को अपने रोम -रोम में उगा लूँ , सपनों में सहेज कर रख लूँ । थोड़ा धूप , थोड़ा बादल और थोड़ा पानी अपने भीतर जमा कर लूँ ।
ताकि मेरे भीतर भी हरियाली हमेशा रहे ।
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