बुधवार, 28 जनवरी 2026

कल रातभर वर्षा होती रही।   इस वर्षा ने प्राकृतिक सौंदर्य में नए  प्राण डाल दिए हैं. बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही वातावरण में एक नयापन आ गया है।पहाड़, पेड़ - पौंधे सब वर्षाजल से नहा धोकर नई चमक के साथ बसंत के स्वागत के लिए तैयार हैं. धरती एक नया उत्सव मना रही है।   जंगली फूल खिलने शुरू हो गए हैं। पतझड़ के बाद वृक्षों में नई  कोपलें आने लगी हैं।  ठण्ड ने अपनी शीतलता की प्रकृति में बदलाव कर दिया है. वर्षा के बाद धूप  ने पहाड़ों को मन  मोहक  रंग बांटने शुरू कर दिए है.    

ऊँची पहाड़ियों में बर्फ गिरनी  शुरू हो गई है। हवा में बर्फ  की ठंडक और  सुई की नोक की तरह चुभन है। वैसे  वर्षा के बाद की ठण्ड हानिकारक नहीं होती है. लेकिन सावधानी तो बरतनी ही होती है. 


गुरुवार, 1 जनवरी 2026

 नमस्कार मित्रो ,

नव वर्ष की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। 

जनवरी की ठिठुरन आरम्भ हो गई है। पतझड़ वाले वृक्षों ने पत्ते छोड़ दिए हैं।  यहाँ भी अद्भुत सौंदर्य है।  शाखों से गिरे पत्तों को सब अपने सुखों या दुखों के अनुसार देखते हैं।  पत्तों के संगीत को सब अपने अनुसार सुनते हैं।  उनके रंग  सबको अलग अलग दिखते हैं।  हवा के साथ उनकी अठखेलियों को सब अपने अपने अनुसार देखते हैं पत्तों से रहित वृक्षों शाखाओं  की स्थिति का वर्णन  भी सभी अपने अनुसार करते हैं।  जैसी मनःस्थिति वैसी दृष्टि और वैसा ही  वर्णन।  

पतझड़ एक अनूठा अनुभव है।  और दर्शन भी।  पतझड़ का होना बताता है कि  नई कोपलें आने वाली हैं ,नए पत्ते आने वाले हैं. नए फूलों का मौसम आने वाला है।  नए फल आने वाले हैं।  

कल रातभर वर्षा होती रही।   इस वर्षा ने प्राकृतिक सौंदर्य में नए  प्राण डाल दिए हैं. बसंत पंचमी के आगमन के साथ ही वातावरण में एक नयापन आ गया ...